Preamble in Hindi, Preamble of Indian Constitution in Hindi
प्रस्तावना क्या है: प्रस्तावना, भारतीय संविधान का पहला पृष्ठ, उस दिल की धड़कन है जिसमें भारत का आदर्श और उद्देश्य सुनाया जाता है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है जो हमारे संविधान की भावना और सिद्धांतों को प्रकट करता है। इस प्रस्तावना में भारतीय समाज के मूल सिद्धांतों की चर्चा की गई है और देश के नागरिकों के लिए एक सशक्त और समृद्ध भविष्य की दिशा में मार्गदर्शन किया गया है।
हिंदी: “हम भारतीय, भारतीय संघ के एक एक अखंड और समुद्र के दोनों ओर समुद्र से घिरे भूखंड में बसने वाले हैं। हम अपने देश के साथ एक अद्वितीय गौरव को देखते हैं और इसके निर्माण में समर्थ हैं। हम अपने देश के सर्वोत्तम हित की प्राप्ति के लिए संघर्षरत हैं और समाजवाद, समानता और धर्मनिरपेक्षता की आदर्श विचारधारा का पालन करते हैं।”
भारतीय संविधान का प्रथम पृष्ठ है और यह उसका मूल भाग है जो संविधान के निर्माणकार्य के पीछे की भावना और सिद्धांतों को दर्शाता है। इसमें भारत के सर्वोत्तम लक्ष्यों और आदर्शों की चर्चा की गई है और यह दर्शाता है कि हम किस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
प्रस्तावना में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं का मतलब है:
प्रस्तावना, भारतीय संविधान की मूल भावना और सिद्धांतों का प्रतीक होती है, जो नागरिकों को उनके अधिकारों और दायित्वों को समझने में मदद करती है। डिजिटल युग में जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है, जिससे नागरिक जनता जागरूक और लोकतंत्र में भागीदार रह सकती है।

” हम, भारत के लोग,
भारत को एक
सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य
बनाने के लिए और
उसके समस्त नागरिकों को
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म व उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता
प्राप्त कराने के लिए तथा
उन सब में व्यक्ति की गरिमा और
राष्ट्र की एकता तथा अखंडता
सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज दिनांक 26 नवंबर 1949 ई. ( मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत् दो हजार छह विक्रमी ) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
WE, THE PEOPLE OF INDIA, having solemnly resolved to constitute India into a [SOVEREIGN SOCIALIST SECULAR DEMOCRATIC REPUBLIC] and to secure to all its citizens:
JUSTICE, social, economic and political;
LIBERTY of thought, expression, belief, faith and worship;
EQUALITY of status and of opportunity;
and to promote among them all
FRATERNITY assuring the dignity of the individual and the 2[unity and integrity of the Nation];
IN OUR CONSTITUENT ASSEMBLY this twentysixth day of November, 1949, do HEREBY ADOPT, ENACT AND GIVE TO OURSELVES THIS CONSTITUTION.